THE RAJASTHAN ASPIRANT

Safalta Ki Aur Ek Kadam

दर्शनशास्त्र: वेदों और उपनिषदों का दर्शन, निष्काम कर्म (गीता), जैन, बौद्ध और गांधीवादी नैतिकता।

RPSC 2nd Grade GK: दर्शनशास्त्र (Philosophy)
Master Strike Set-1: भारतीय दर्शन और नैतिकता (1 to 80)
प्रश्न 1: वेदों में 'ऋत' (Rta) की अवधारणा का क्या अर्थ है?
 * (अ) केवल यज्ञ करना।
 * (ब) ब्रह्मांडीय और नैतिक व्यवस्था (Cosmic and Moral Order)।
 * (स) वर्षा का देवता।
 * (द) व्यक्तिगत इच्छा।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: 'ऋत' वेदों की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है। यह वह प्राकृतिक और नैतिक नियम है जिससे पूरा ब्रह्मांड संचालित होता है। देवताओं को भी 'ऋतस्य गोपा' (ऋत का रक्षक) कहा गया है।

प्रश्न 2: उपनिषदों को 'वेदांत' (Vedanta) क्यों कहा जाता है?
 * (अ) क्योंकि ये वेदों का अंतिम भाग हैं। (End of Vedas)
 * (ब) क्योंकि ये वेदों का खंडन करते हैं।
 * (स) क्योंकि इनकी रचना सबसे पहले हुई।
 * (द) क्योंकि ये केवल ऋग्वेद पर आधारित हैं।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: वेदों के चार भाग हैं—संहिता, ब्राह्मण, आरण्यक और उपनिषद। उपनिषद वेदों के अंत में आते हैं और इनमें वेदों का सार (ज्ञान) छिपा है, इसलिए इन्हें 'वेदांत' कहते हैं।

प्रश्न 3: गीता के 'निष्काम कर्म' (Nishkama Karma) का मुख्य संदेश क्या है?
 * (अ) कर्म का त्याग करना।
 * (ब) फल की आसक्ति के बिना कर्तव्य का पालन करना (Duty without attachment to results)।
 * (स) केवल फल की चिंता करना।
 * (द) कर्म से बचना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: भगवान कृष्ण कहते हैं—'कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन'। अर्थात् तुम्हारा अधिकार केवल कर्म करने पर है, उसके फल पर नहीं। फल की इच्छा छोड़कर किया गया कर्म ही बंधन मुक्त करता है।

प्रश्न 4: जैन दर्शन के 'त्रिरत्न' (Triratna) में कौन सा शामिल नहीं है?
 * (अ) सम्यक् दर्शन
 * (ब) सम्यक् ज्ञान
 * (स) सम्यक् वाक् (Right Speech - Buddhism)
 * (द) सम्यक् चरित्र
   उत्तर: (स)
   व्याख्या: जैन धर्म के त्रिरत्न हैं—सम्यक् दर्शन (श्रद्धा), सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र (आचरण)। 'सम्यक् वाक्' बौद्ध धर्म के अष्टांगिक मार्ग का हिस्सा है।

प्रश्न 5: बौद्ध दर्शन का 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (Pratityasamutpada) सिद्धांत क्या है?
 * (अ) ईश्वर की सत्ता का प्रमाण।
 * (ब) कारण-कार्य का सिद्धांत (Dependent Origination)।
 * (स) आत्मा की अमरता।
 * (द) मूर्ति पूजा का आधार।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: इसका अर्थ है—'इसके होने पर वह होता है'। अर्थात् संसार की हर घटना का कोई न कोई कारण है। दुःख का भी कारण (अविद्या) है और कारण के नाश से दुःख का नाश संभव है।

प्रश्न 6: गांधीजी के 'सत्याग्रह' (Satyagraha) का मूल आधार क्या है?
 * (अ) शत्रु को डराना।
 * (ब) सत्य और अहिंसा (Truth and Non-violence)।
 * (स) केवल धरना देना।
 * (द) राजनीतिक लाभ।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सत्याग्रह का अर्थ है—'सत्य के लिए आग्रह करना'। गांधीजी के अनुसार सत्याग्रही शारीरिक बल का नहीं, बल्कि आत्मबल का प्रयोग करता है और शत्रु के हृदय को प्रेम से जीतता है।

प्रश्न 7: उपनिषदों का मूल प्रतिपाद्य (Main Subject) क्या है?
 * (अ) यज्ञों की विधि।
 * (ब) आत्मज्ञान और ब्रह्मविद्या (Self-realization and Brahma-vidya)।
 * (स) युद्ध के नियम।
 * (द) चिकित्सा विज्ञान।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: उपनिषदों में 'अहं ब्रह्मास्मि' (मैं ब्रह्म हूँ) और 'तत्वमसि' (वह तुम हो) जैसे महावाक्यों के जरिए आत्मा और परमात्मा की एकता बताई गई है।

प्रश्न 8: गीता में 'स्वधर्म' (Svadharma) का क्या अर्थ है?
 * (अ) दूसरों के धर्म का पालन।
 * (ब) अपनी प्रकृति और वर्ण के अनुसार कर्तव्य (Duty as per one's nature)।
 * (स) धर्म परिवर्तन।
 * (द) केवल पूजा पाठ।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: कृष्ण अर्जुन से कहते हैं कि 'श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः'—अर्थात अपना दोषपूर्ण धर्म (कर्तव्य) भी दूसरे के अच्छे धर्म से श्रेष्ठ है। अर्जुन का स्वधर्म 'युद्ध' करना था क्योंकि वह क्षत्रिय था।

प्रश्न 9: जैन धर्म के 'पंच महाव्रत' में 'अपरिग्रह' का क्या अर्थ है?
 * (अ) चोरी न करना।
 * (ब) धन और वस्तुओं का संचय न करना (Non-possession)।
 * (स) सत्य बोलना।
 * (द) अहिंसा का पालन।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: अपरिग्रह का अर्थ है अपनी आवश्यकता से अधिक वस्तुओं को इकट्ठा न करना, क्योंकि संचय ही मोह और हिंसा का कारण बनता है।

प्रश्न 10: बुद्ध के 'चार आर्य सत्य' (Four Noble Truths) में प्रथम क्या है?
 * (अ) दुःख (Sorrow)।
 * (ब) दुःख समुदाय (Cause of sorrow)।
 * (स) दुःख निरोध (End of sorrow)।
 * (द) मार्ग (Way to end sorrow)।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: बुद्ध ने संसार को 'सर्वं दुःखं' (सब दुःख है) कहा। पहला सत्य है कि संसार में दुःख है, दूसरा उसका कारण है, तीसरा उसका निवारण है और चौथा निवारण का मार्ग है।

प्रश्न 11: गांधीजी की 'अहिंसा' (Non-violence) का स्वरूप कैसा है?
 * (अ) कायरों की अहिंसा।
 * (ब) मन, वचन और कर्म की पूर्ण अहिंसा (Active non-violence of the brave)।
 * (स) केवल शारीरिक चोट न पहुँचाना।
 * (द) मजबूरी की अहिंसा।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी के लिए अहिंसा कायरता नहीं बल्कि साहस है। इसमें केवल हत्या न करना ही नहीं, बल्कि किसी के प्रति मन में बुरा विचार न लाना भी शामिल है।

प्रश्न 12: वेदों के अनुसार 'पुरुषार्थ' (Purushartha) की सही क्रम क्या है?
 * (अ) अर्थ, काम, धर्म, मोक्ष
 * (ब) धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष (Dharma, Artha, Kama, Moksha)
 * (स) मोक्ष, धर्म, काम, अर्थ
 * (द) काम, अर्थ, मोक्ष, धर्म
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: धर्म (नैतिकता) के आधार पर अर्थ (धन) और काम (इच्छा) की पूर्ति करते हुए अंतिम लक्ष्य मोक्ष (मुक्ति) को प्राप्त करना ही भारतीय जीवन दर्शन है।

प्रश्न 13: उपनिषदों में 'श्रेय' और 'प्रेय' का क्या अर्थ है?
 * (अ) श्रेय—कल्याणकारी, प्रेय—प्रिय लगने वाला (Benevolent vs Pleasant)।
 * (ब) दोनों का अर्थ समान है।
 * (स) श्रेय—धन, प्रेय—ईश्वर।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: कठोपनिषद में यमराज नचिकेता को बताते हैं कि जो मार्ग कल्याणकारी (श्रेय) है वह कठिन है, जबकि जो प्रिय (प्रेय) लगता है वह पतन की ओर ले जाता है।

प्रश्न 14: गीता में 'स्थितप्रज्ञ' (Sthitapragya) किसे कहा गया है?
 * (अ) जो बहुत पढ़ा-लिखा हो।
 * (ब) जिसकी बुद्धि सुख-दुःख में स्थिर रहे (Equanimous mind)।
 * (स) जो केवल ध्यान करता हो।
 * (द) जो युद्ध से डरता हो।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: स्थितप्रज्ञ वह व्यक्ति है जो न तो सफलता में बहुत खुश होता है और न ही विफलता में टूटता है। वह कछुए की तरह अपनी इंद्रियों को वश में रखता है।

प्रश्न 15: जैन दर्शन का 'स्याद्वाद' (Syadvada) सिद्धांत क्या है?
 * (अ) ज्ञान की सापेक्षता (Relativity of knowledge)।
 * (ब) ईश्वर का अस्तित्व।
 * (स) वेदों की प्रमाणिकता।
 * (द) पुनर्जन्म का अंत।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: इसे 'सप्तभंगी नय' भी कहते हैं। इसके अनुसार हमारा ज्ञान अधूरा है, इसलिए किसी भी सत्य को पूर्ण न मानकर 'शायद' (स्यात्) के साथ देखना चाहिए।

प्रश्न 16: बुद्ध के 'अष्टांगिक मार्ग' (Eightfold Path) का उद्देश्य क्या है?
 * (अ) स्वर्ग प्राप्त करना।
 * (ब) मध्यम मार्ग अपनाकर निर्वाण प्राप्त करना (Nirvana via Middle Path)।
 * (स) धन कमाना।
 * (द) शक्तिशाली बनना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बुद्ध ने 'मध्यम मार्ग' (Middle Path) पर जोर दिया—न तो अत्यधिक भोग और न ही अत्यधिक कठोर तप। इसी मार्ग से तृष्णा का अंत और निर्वाण मिलता है।

प्रश्न 17: गांधीजी के 'न्यासधारिता' (Trusteeship) सिद्धांत का अर्थ क्या है?
 * (अ) सारी संपत्ति गरीबों में बाँट देना।
 * (ब) अमीर अपनी संपत्ति का मालिक नहीं, बल्कि समाज का रक्षक (Trustee) है। (Owner as a caretaker)
 * (स) निजी संपत्ति को खत्म करना।
 * (द) विदेशी बैंकों में धन रखना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी का मानना था कि अमीरों को अपनी जरूरत से ज़्यादा धन को समाज की अमानत समझना चाहिए और उसका उपयोग जनकल्याण में करना चाहिए।

प्रश्न 18: 'कठोपनिषद' में यम और किसके बीच संवाद है?
 * (अ) अर्जुन
 * (ब) नचिकेता (Nachiketa)
 * (स) श्वेताकेतु
 * (द) गार्गी
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बालक नचिकेता यमराज से मृत्यु का रहस्य पूछता है। यह उपनिषद आत्मा की अमरता और योग के महत्व को समझाता है।

प्रश्न 19: गीता के अनुसार 'लोकसंग्रह' का अर्थ क्या है?
 * (अ) लोगों को इकट्ठा करना।
 * (ब) समाज का कल्याण और व्यवस्था बनाए रखना (Welfare of the world)।
 * (स) राजा की सेवा।
 * (द) युद्ध की तैयारी।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: निष्काम कर्म योगी केवल अपनी मुक्ति के लिए नहीं, बल्कि समाज को सही रास्ता दिखाने (लोकसंग्रह) के लिए भी कर्म करता है।

प्रश्न 20: जैन धर्म के 'अनेकांतवाद' (Anekantavada) का तात्पर्य है:
 * (अ) सत्य एक है।
 * (ब) सत्य के अनेक पहलू होते हैं (Reality has multiple aspects)।
 * (स) ईश्वर नहीं है।
 * (द) इनमें से कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: अनेकांतवाद सिखाता है कि सत्य के कई दृष्टिकोण हो सकते हैं। यह दूसरे के विचारों का सम्मान करने और कट्टरता से बचने की प्रेरणा देता है।

प्रश्न 21: वेदों में 'वरुण' देवता को किस व्यवस्था का रक्षक माना गया है?
 * (अ) युद्ध
 * (ब) ऋत (Rta - Moral Order)
 * (स) वर्षा
 * (द) अग्नि
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: वरुण देव 'ऋतस्य गोपा' कहलाते हैं। वे संसार के नैतिक नियमों की देखरेख करते हैं और पापियों को दंड देते हैं।

प्रश्न 22: 'तत्वमसि' (Tat Tvam Asi) महावाक्य किस उपनिषद से लिया गया है?
 * (अ) मांडूक्य
 * (ब) छांदोग्य उपनिषद (Chandogya Upanishad)
 * (स) ईशोपनिषद
 * (द) मुण्डकोपनिषद
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: इसका अर्थ है—"वह (ब्रह्म) तुम ही हो।" यह आत्मा और परमात्मा की एकता का सबसे बड़ा सूत्र है।

प्रश्न 23: गीता में 'यज्ञ' (Yajna) का व्यापक अर्थ क्या है?
 * (अ) केवल वेदी में आहुति देना।
 * (ब) नि:स्वार्थ भाव से समाज के लिए किया गया कार्य (Selfless service as sacrifice)।
 * (स) पशु बलि।
 * (द) राजा का सम्मान।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गीता में कर्म, ज्ञान और भक्ति को भी यज्ञ माना गया है। वह कार्य जो फल की इच्छा के बिना दूसरों के लिए हो, वही यज्ञ है।

प्रश्न 24: जैन धर्म में 'कैवल्य' (Kaivalya) का अर्थ क्या है?
 * (अ) स्वर्ग जाना।
 * (ब) पूर्ण ज्ञान की प्राप्ति (Supreme Knowledge/Liberation)।
 * (स) घर छोड़ना।
 * (द) युद्ध जीतना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: जब आत्मा से कर्मों का बंधन पूरी तरह खत्म हो जाता है, तो उसे 'अनंत ज्ञान' मिलता है, जिसे कैवल्य कहते हैं।

प्रश्न 25: बौद्ध धर्म में 'निर्वाण' (Nirvana) का क्या अर्थ है?
 * (अ) मृत्यु।
 * (ब) तृष्णा (इच्छाओं) का बुझ जाना (Extinguishing the flame of desire)।
 * (स) पुनर्जन्म लेना।
 * (द) स्वर्ग का सुख।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: निर्वाण का शाब्दिक अर्थ है 'बुझ जाना'। जैसे दीपक की लौ बुझ जाती है, वैसे ही इच्छाओं के बुझने पर दुःखों का अंत हो जाता है।

प्रश्न 26: गांधीजी के अनुसार 'सत्य' (Truth) क्या है?
 * (अ) केवल सच बोलना।
 * (ब) ईश्वर ही सत्य है (Truth is God)।
 * (स) बहुमत की राय।
 * (द) सफलता।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी पहले कहते थे 'ईश्वर सत्य है', लेकिन बाद में उन्होंने कहा 'सत्य ही ईश्वर है' क्योंकि सत्य को कोई नकार नहीं सकता।

प्रश्न 27: वेदों में 'यज्ञ' (Sacrifice) का महत्व क्या है?
 * (अ) केवल दिखावा।
 * (ब) देवताओं को प्रसन्न करना और ऋत का संतुलन बनाना (Maintaining cosmic balance)।
 * (स) खाना पकाना।
 * (द) मनोरंजन।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: वेदों में यज्ञ को संसार का चक्र चलाने का माध्यम माना गया है। इससे वर्षा, समृद्धि और शांति आती है।

प्रश्न 28: 'सत्यमेव जयते' कहाँ से लिया गया है?
 * (अ) मुण्डकोपनिषद (Mundaka Upanishad)
 * (ब) गीता
 * (स) ऋग्वेद
 * (द) सामवेद
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: यह सूत्र वाक्य हमारे राष्ट्रीय प्रतीक का हिस्सा है, जिसका अर्थ है—"सत्य की ही जीत होती है।"

प्रश्न 29: गीता के अनुसार 'संन्यास' (Renunciation) का वास्तविक अर्थ है:
 * (अ) घर छोड़कर वन जाना।
 * (ब) कर्मों के फल का त्याग करना (Renouncing the fruits of action)।
 * (स) काम न करना।
 * (द) केवल भगवा वस्त्र पहनना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गीता 'कर्म संन्यास' से बेहतर 'कर्म योग' को मानती है। असली संन्यासी वह है जो संसार में रहकर भी फल की इच्छा से मुक्त है।

प्रश्न 30: जैन धर्म के 'अणुव्रत' (Anuvrata) किसके लिए हैं?
 * (अ) केवल भिक्षुओं के लिए।
 * (ब) गृहस्थों के लिए (For laypersons - Simplified vows)।
 * (स) राजाओं के लिए।
 * (द) बच्चों के लिए।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: भिक्षुओं के लिए 'महाव्रत' (कठोर) और गृहस्थों के लिए 'अणुव्रत' (थोड़े सरल) नियम बनाए गए हैं ताकि वे भी नैतिक जीवन जी सकें।

प्रश्न 31: बुद्ध के अनुसार 'अष्टांगिक मार्ग' के किस भाग में 'ध्यान' शामिल है?
 * (अ) प्रज्ञा
 * (ब) शील
 * (स) समाधि (Samadhi)
 * (द) ज्ञान
   उत्तर: (स)
   व्याख्या: अष्टांगिक मार्ग को तीन भागों में बाँटा गया है—प्रज्ञा (ज्ञान), शील (चरित्र) और समाधि (एकाग्रता)। सम्यक् व्यायाम, सम्यक् स्मृति और सम्यक् समाधि इसी का हिस्सा हैं।

प्रश्न 32: गांधीजी ने 'साध्य और साधन' (Ends and Means) के बारे में क्या कहा?
 * (अ) केवल साध्य (लक्ष्य) पवित्र होना चाहिए।
 * (ब) साध्य और साधन दोनों पवित्र होने चाहिए (Both means and ends must be pure)।
 * (स) लक्ष्य पाने के लिए गलत रास्ता अपना सकते हैं।
 * (द) साधन महत्वपूर्ण नहीं हैं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी का मानना था कि "जैसा बीज होगा वैसा ही फल होगा।" यदि हम गलत तरीके (साधन) से आज़ादी (साध्य) पाते हैं, तो वह आज़ादी फलदायी नहीं होगी।

प्रश्न 33: उपनिषदों में 'आत्मा' (Self) के बारे में क्या कहा गया है?
 * (अ) यह शरीर के साथ नष्ट हो जाती है।
 * (ब) यह अजर, अमर और अविनाशी है (Eternal and indestructible)।
 * (स) यह केवल मस्तिष्क का हिस्सा है।
 * (द) आत्मा नहीं होती।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: उपनिषद कहते हैं कि जैसे मनुष्य पुराने वस्त्र छोड़कर नए पहनता है, वैसे ही आत्मा एक शरीर से दूसरे में जाती है, लेकिन वह स्वयं कभी नहीं मरती।

प्रश्न 34: गीता में 'स्थितप्रज्ञ' के लक्षणों का वर्णन किस अध्याय में है?
 * (अ) प्रथम
 * (ब) द्वितीय अध्याय (2nd Chapter - Sankhya Yoga)
 * (स) बारहवां
 * (द) अठारहवां
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: दूसरे अध्याय के श्लोक 54 से 72 में अर्जुन के सवाल पर कृष्ण ने स्थितप्रज्ञ के लक्षणों की विस्तृत व्याख्या की है।

प्रश्न 35: जैन धर्म के 'महाव्रत' की संख्या कितनी है?
 * (अ) 3
 * (ब) 5 (Ahimsa, Satya, Asteya, Brahmacharya, Aparigraha)
 * (स) 10
 * (द) 8
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: महावीर स्वामी ने पार्श्वनाथ के चार व्रतों में 'ब्रह्मचर्य' जोड़कर इन्हें पाँच महाव्रत बनाया था।

प्रश्न 36: बौद्ध धर्म के 'त्रिपिटक' में कौन सा शामिल नहीं है?
 * (अ) विनय पिटक
 * (ब) सुत्त पिटक
 * (स) अभिधम्म पिटक
 * (द) ज्ञान पिटक (No such Pitaka)
   उत्तर: (द)
   व्याख्या: बुद्ध की शिक्षाओं को तीन टोकरियों (पिटक) में रखा गया है—विनय (नियम), सुत्त (उपदेश) और अभिधम्म (दर्शन)।

प्रश्न 37: गांधीजी ने 'सर्वोदय' (Sarvodaya) का विचार किससे प्रभावित होकर लिया?
 * (अ) जॉन रस्किन (Unto This Last)
 * (ब) कार्ल मार्क्स
 * (स) लेनिन
 * (द) एडल अहुजा
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: 'सर्वोदय' का अर्थ है 'सबका उदय' (Welfare of all)। रस्किन की पुस्तक से गांधीजी ने सीखा कि अंतिम व्यक्ति का कल्याण ही समाज का कल्याण है।

प्रश्न 38: वेदों में 'ऋण' (Debt) की अवधारणा में कौन सा ऋण शामिल नहीं है?
 * (अ) देव ऋण
 * (ब) ऋषि ऋण
 * (स) पितृ ऋण
 * (द) राज ऋण (No such spiritual debt)
   उत्तर: (द)
   व्याख्या: हर व्यक्ति पर जन्म से तीन ऋण माने गए हैं—देव (यज्ञ से चुकाना), ऋषि (स्वाध्याय से) और पितृ (संतान उत्पत्ति से)।

प्रश्न 40: गीता में 'ज्ञान योग' और 'कर्म योग' का समन्वय क्या कहलाता है?
 * (अ) बुद्धियोग (Buddhi Yoga)
 * (ब) हठयोग
 * (स) तंत्र योग
 * (द) राजयोग
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: जब बुद्धि स्थिर होकर यह जान लेती है कि क्या कर्तव्य है, तो वह ज्ञान युक्त कर्म बन जाता है, जिसे बुद्धियोग कहा गया है।

प्रश्न 41: 'अद्वैत वेदांत' के अनुसार जगत का स्वरूप क्या है?
 * (अ) सत्य
 * (ब) मिथ्या/माया (Illusion/Maya)
 * (स) शून्य
 * (द) ईश्वर का हिस्सा
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: शंकराचार्य के अनुसार 'ब्रह्म सत्यं जगन्मिथ्या'—केवल ब्रह्म सत्य है और यह संसार एक आभास या माया है।

प्रश्न 42: जैन दर्शन के 'स्याद्वाद' को 'अंधों और हाथी' की कहानी से किसने समझाया?
 * (अ) महावीर स्वामी के अनुयायियों ने (Traditional Jain Parable)
 * (ब) गौतम बुद्ध
 * (स) विवेकानंद
 * (द) कौटिल्य
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: यह कहानी बताती है कि हर अंधा हाथी के एक अंग को छूकर उसे ही पूरा सत्य मान लेता है, वैसे ही हम सत्य के एक अंश को ही पूरा सत्य मान बैठते हैं।

प्रश्न 43: बौद्ध धर्म के अनुसार 'निर्वाण' की प्राप्ति कब संभव है?
 * (अ) केवल मृत्यु के बाद।
 * (ब) इसी जीवन में (Jivanmukti/Nirvana in this life)।
 * (स) पुनर्जन्म में।
 * (द) कभी नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बुद्ध ने स्वयं इसी जीवन में बोधगया में निर्वाण प्राप्त किया था। मृत्यु के बाद की स्थिति को 'महापरिनिर्वाण' कहा जाता है।

प्रश्न 44: गांधीजी के 'स्वदेशी' (Swadeshi) विचार का अर्थ है:
 * (अ) केवल विदेशी वस्तुओं को जलाना।
 * (ब) अपने निकटतम परिवेश की वस्तुओं और सेवाओं का उपयोग (Support for local economy)।
 * (स) मशीनों का पूर्ण विरोध।
 * (द) अन्य देशों से नफरत।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: स्वदेशी का अर्थ है स्वावलंबन। अपने पड़ोसियों और स्थानीय कारीगरों की मदद करना ही वास्तविक स्वदेशी है।

प्रश्न 45: गीता में 'त्रिगुण' (Three Gunas) में कौन सा शामिल नहीं है?
 * (अ) सत्व
 * (ब) रज
 * (स) तम
 * (द) मोह (Moh is a result, not a guna)
   उत्तर: (द)
   व्याख्या: प्रकृति तीन गुणों से बनी है—सत्व (ज्ञान/प्रकाश), रज (क्रिया/चंचलता) और तम (अज्ञान/अंधकार)।

प्रश्न 46: 'आरण्यक' ग्रंथों का नामकरण 'वन' (Aranya) पर क्यों हुआ?
 * (अ) क्योंकि वे वनों में लिखे और पढ़े जाते थे (Forest Texts)।
 * (ब) क्योंकि उनमें पेड़ों का वर्णन है।
 * (स) क्योंकि वे केवल वनवासियों के लिए थे।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: आरण्यक ब्राह्मण और उपनिषदों के बीच की कड़ी हैं, जिनमें दार्शनिक रहस्यों पर वनों के एकांत में चिंतन किया गया है।

प्रश्न 47: जैन धर्म के अनुसार 'अहिंसा' का पालन किसके लिए सबसे कठिन है?
 * (अ) योद्धा के लिए।
 * (ब) किसान के लिए (Because of micro-organisms in soil)।
 * (स) व्यापारी के लिए।
 * (द) भिक्षु के लिए।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: जैन धर्म में खेती को भी हिंसा माना गया क्योंकि हल चलाने से सूक्ष्म जीवों की हत्या होती है। इसलिए जैन लोग व्यापार की ओर ज़्यादा मुड़े।

प्रश्न 48: बुद्ध ने 'ईश्वर' के बारे में क्या कहा?
 * (अ) ईश्वर है।
 * (ब) बुद्ध इस विषय पर मौन रहे (Anishvarvada/Silence on metaphysical questions)।
 * (स) ईश्वर नहीं है।
 * (द) मैं ही ईश्वर हूँ।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बुद्ध अव्याकृत प्रश्नों (जैसे ईश्वर है या नहीं) पर मौन रहते थे। उनका जोर केवल दुःख दूर करने पर था, न कि व्यर्थ की दार्शनिक बहस पर।

प्रश्न 49: गांधीजी के 'सप्त सामाजिक पाप' (Seven Social Sins) में शामिल है:
 * (अ) सिद्धांत बिना राजनीति।
 * (ब) काम बिना धन।
 * (स) चरित्र बिना ज्ञान।
 * (द) उपरोक्त सभी।
   उत्तर: (द)
   व्याख्या: गांधीजी ने 'यंग इंडिया' में 7 पाप गिनाए थे—जैसे त्याग बिना पूजा, मानवता बिना विज्ञान आदि।

प्रश्न 50: 'उपनिषद' शब्द का शाब्दिक अर्थ है:
 * (अ) ऊपर जाना।
 * (ब) गुरु के पास निष्ठापूर्वक बैठना (Sitting down near the teacher)।
 * (स) किताब पढ़ना।
 * (द) गीत गाना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: उप (निकट), नि (निष्ठापूर्वक), सद (बैठना)। गुरु के पास बैठकर जो गुप्त ज्ञान सीखा जाए, वही उपनिषद है।

प्रश्न 51: गीता के अनुसार 'बुद्धि' का क्या कार्य है?
 * (अ) केवल सपने देखना।
 * (ब) सही और गलत का निर्णय करना (Discrimination/Decision making)।
 * (स) चंचल रहना।
 * (द) सो जाना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गीता में बुद्धि को 'सारथी' माना गया है जो मन रूपी घोड़ों को नियंत्रित कर सही दिशा में ले जाती है।

प्रश्न 52: जैन धर्म में 'पंचशील' सिद्धांतों का आधार क्या है?
 * (अ) हिंसा
 * (ब) अहिंसा (Ahimsa is the paramount religion)
 * (स) चोरी
 * (द) संपत्ति
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: 'अहिंसा परमो धर्म:' जैन धर्म का मूल मंत्र है। बाकी चारों व्रत अहिंसा को ही पुष्ट करते हैं।

प्रश्न 53: बुद्ध के 'अष्टांगिक मार्ग' में 'सम्यक् व्यायाम' (Right Effort) का अर्थ है:
 * (अ) कसरत करना।
 * (ब) मन में बुरे विचारों को आने से रोकना और अच्छे विचारों को बढ़ाना (Mental discipline)।
 * (स) युद्ध अभ्यास।
 * (द) दौड़ना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: यहाँ 'व्यायाम' का अर्थ शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक प्रयास से है, ताकि चित्त शुद्ध रहे।

प्रश्न 54: गांधीजी ने 'उपवास' (Fasting) को क्या माना है?
 * (अ) भूख हड़ताल।
 * (ब) आत्म-शुद्धि और हृदय परिवर्तन का एक शस्त्र (A weapon for self-purification)।
 * (स) वजन कम करने का तरीका।
 * (द) दिखावा।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सत्याग्रही उपवास का प्रयोग अंतिम शस्त्र के रूप में करता है ताकि विरोधी के मन में दया और सत्य का संचार हो।

प्रश्न 55: 'मुण्डकोपनिषद' प्रसिद्ध है क्योंकि:
 * (अ) इसमें आत्मा नहीं है।
 * (ब) इसमें 'यज्ञों' की तुलना 'टूटी हुई नौका' से की गई है (Rituals as fragile rafts)।
 * (स) यह बहुत बड़ा है।
 * (द) यह सबसे पुराना है।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: यह उपनिषद केवल कर्मकांडों को पर्याप्त नहीं मानता और ज्ञान को मोक्ष का असली मार्ग बताता है।

प्रश्न 56: गीता में 'भक्ति' का सबसे बड़ा लक्षण क्या है?
 * (अ) माला फेरना।
 * (ब) भगवान के प्रति पूर्ण शरणागति (Surrender to God/Prapatti)।
 * (स) मंदिर जाना।
 * (द) दान देना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: 'सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज'—कृष्ण कहते हैं कि सब कुछ छोड़कर मेरी शरण में आ जाओ, मैं तुम्हें पापों से मुक्त कर दूँगा।

प्रश्न 57: जैन धर्म में 'दिगंबर' और 'श्वेतांबर' का मुख्य मतभेद क्या है?
 * (अ) अहिंसा पर।
 * (ब) वस्त्रों के त्याग और मोक्ष की पात्रता पर (Nakedness and clothes)।
 * (स) भोजन पर।
 * (द) भाषा पर।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: दिगंबर मानते हैं कि पूर्ण मोक्ष के लिए वस्त्रों का त्याग जरूरी है, जबकि श्वेतांबर सफेद वस्त्र धारण करने को सही मानते हैं।

प्रश्न 58: बुद्ध के अनुसार 'दुःख' का मूल कारण क्या है?
 * (अ) गरीबी।
 * (ब) तृष्णा (Desire/Craving)।
 * (स) शत्रु।
 * (द) भाग्य।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: जब तक मनुष्य के मन में पाने की लालसा (तृष्णा) रहेगी, वह दुःखी रहेगा। तृष्णा का अंत ही दुःख का अंत है।

प्रश्न 59: गांधीजी के 'आश्रम भजनावली' का प्रिय भजन 'वैष्णव जन तो...' के रचयिता कौन हैं?
 * (अ) कबीर
 * (ब) नरसिंह मेहता (Narsinh Mehta)
 * (स) मीराबाई
 * (द) तुलसीदास
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: यह भजन गांधीजी के जीवन दर्शन को दर्शाता है, जिसमें परोपकार और सादगी को महत्व दिया गया है।

प्रश्न 60: 'ईशोपनिषद' का पहला मंत्र किस पर जोर देता है?
 * (अ) संचय करने पर।
 * (ब) त्यागपूर्वक भोग करने पर (Enjoy through renunciation - Tena Tyaktena Bhunjithah)।
 * (स) युद्ध करने पर।
 * (द) भागने पर।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: 'तेन त्यक्तेन भुंजीथा'—अर्थात संसार की वस्तुओं का उपयोग करो, लेकिन उनमें आसक्त मत हो, उन्हें त्याग भाव से भोगो।

प्रश्न 61: वेदों में 'सोम' किसका देवता है?
 * (अ) अग्नि
 * (ब) वनस्पतियों का देवता (God of plants/Som-ras)
 * (स) आकाश
 * (द) पाताल
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: ऋग्वेद का 9वां मंडल पूरी तरह सोम देवता को समर्पित है।

प्रश्न 62: गीता के अनुसार 'पंडित' (Wise) कौन है?
 * (अ) जो बहुत श्लोक जानता हो।
 * (ब) जो जीवित और मृत—दोनों के लिए शोक नहीं करता (Who grieves not for the living or dead)।
 * (स) जो मंदिर में रहता हो।
 * (द) जो संस्कृत बोलता हो।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: विद्वान वह है जो जानता है कि आत्मा अमर है, इसलिए वह मृत्यु से विचलित नहीं होता।

प्रश्न 63: जैन धर्म में 'अहिंसा' का अर्थ है:
 * (अ) केवल हत्या न करना।
 * (ब) किसी भी जीव को मन, वचन या कर्म से कष्ट न पहुँचाना (Strict non-violence)।
 * (स) आत्मरक्षा में हिंसा करना।
 * (द) युद्ध लड़ना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: जैन धर्म की अहिंसा अत्यंत सूक्ष्म है। इसमें सूक्ष्म कीटाणुओं की रक्षा का भी विधान है।

प्रश्न 64: 'बुद्ध चरित' के लेखक अश्वघोष किस काल के थे?
 * (अ) मौर्य काल
 * (ब) कुषाण काल (Kanishka's court)
 * (स) गुप्त काल
 * (द) मुगल काल
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: अश्वघोष कनिष्क के समकालीन थे और उन्होंने बुद्ध की जीवनी 'बुद्ध चरित' लिखी।

प्रश्न 65: गांधीजी के अनुसार 'स्वराज' (Swaraj) का अर्थ है:
 * (अ) केवल अंग्रेजों को भगाना।
 * (ब) स्वयं पर स्वयं का शासन (Self-rule and self-restraint)।
 * (स) अधिक अधिकार पाना।
 * (द) कानून न मानना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: 'स्वराज' का अर्थ केवल राजनीतिक स्वतंत्रता नहीं, बल्कि अपनी इंद्रियों और लालसाओं पर नियंत्रण पाना भी है।

प्रश्न 66: उपनिषदों में 'ओम' (OM) को क्या माना गया है?
 * (अ) एक साधारण शब्द।
 * (ब) ब्रह्म का प्रतीक और सर्वोच्च ध्वनि (Symbol of Brahman)।
 * (स) युद्ध का मंत्र।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: ओम को सभी मंत्रों का सार और सृष्टि की आदि ध्वनि माना गया है।

प्रश्न 70: 'रायसीना डायलॉग' (Raisina Dialogue) की तर्ज पर दर्शनशास्त्र में 'संवाद' का सबसे ऊँचा रूप क्या कहलाता है?
 * (अ) शास्त्रार्थ (Shastrarth/Debate)
 * (ब) पंचायत
 * (स) सभा
 * (द) गोष्ठी
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: राजा जनक और याज्ञवल्क्य के बीच हुए शास्त्रार्थ उपनिषदों की गौरवशाली परंपरा हैं।

प्रश्न 71: 'अस्तेय' का क्या अर्थ है?
 * (अ) झूठ न बोलना।
 * (ब) चोरी न करना (Non-stealing)।
 * (स) नशा न करना।
 * (द) दान न लेना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: जैन और योग दर्शन में अस्तेय का अर्थ है किसी दूसरे की वस्तु को उसकी अनुमति के बिना मन में भी न लेना।

प्रश्न 72: बुद्ध ने अपना पहला उपदेश 'धर्मचक्र प्रवर्तन' कहाँ दिया था?
 * (अ) कुशीनगर
 * (ब) सारनाथ (Sarnath)
 * (स) लुम्बिनी
 * (द) बोधगया
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बोधगया में ज्ञान प्राप्त करने के बाद बुद्ध ने वाराणसी के पास सारनाथ में अपने पाँच शिष्यों को पहला उपदेश दिया।

प्रश्न 73: गांधीजी की आत्मकथा 'सत्य के साथ मेरे प्रयोग' मूलतः किस भाषा में लिखी गई थी?
 * (अ) हिंदी
 * (ब) गुजराती (Gujarati)
 * (स) अंग्रेजी
 * (द) मराठी
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: 'सत्यना प्रयोगो' (The Story of My Experiments with Truth) मूलतः गुजराती में थी, जिसे बाद में महादेव देसाई ने अंग्रेजी में अनुवादित किया।

प्रश्न 74: 'योगस्थः कुरु कर्माणि' श्लोक का अर्थ है:
 * (अ) योग करके सो जाओ।
 * (ब) योग में स्थित होकर (समत्व भाव से) कर्म करो (Perform action, dwelling in Union)।
 * (स) केवल योग करो, कर्म नहीं।
 * (द) कर्म छोड़कर योग सीखो।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: यहाँ योग का अर्थ है 'समत्व'—सफलता और विफलता में समान रहना।

प्रश्न 75: जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर कौन थे?
 * (अ) ऋषभदेव
 * (ब) महावीर स्वामी (Mahavira)
 * (स) पार्श्वनाथ
 * (द) अरिष्टनेमि
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: महावीर स्वामी जैन धर्म के अंतिम और सबसे प्रभावशाली तीर्थंकर थे।

प्रश्न 76: 'प्रज्ञापरामित' सूत्र किस दर्शन से संबंधित है?
 * (अ) जैन
 * (ब) बौद्ध (Mahayana Buddhism)
 * (स) वैदिक
 * (द) चारवाक
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: यह महायान बौद्ध धर्म का एक प्रमुख ग्रंथ है जो ज्ञान की पराकाष्ठा को समझाता है।

प्रश्न 77: गांधीजी के 'रामराज्य' का तात्पर्य क्या था?
 * (अ) केवल हिंदुओं का शासन।
 * (ब) एक आदर्श समाज जहाँ अंतिम व्यक्ति को न्याय मिले (Sovereignty of the people based on pure moral authority)।
 * (स) राजा का तानाशाही शासन।
 * (द) इनमें से कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी के लिए रामराज्य का अर्थ था 'सत्य और न्याय का शासन' जहाँ कोई दुःखी न हो।

प्रश्न 78: 'उपनिषद' किस काल की रचनाएं मानी जाती हैं?
 * (अ) पूर्व वैदिक काल
 * (ब) उत्तर वैदिक काल (Later Vedic Period - 800-500 BCE)
 * (स) मौर्य काल
 * (द) आधुनिक काल
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: वेदों के बाद जब कर्मकांडों के प्रति असंतोष बढ़ा, तब उपनिषदों में ज्ञान मार्ग की खोज हुई।

प्रश्न 79: 'निष्काम कर्म' योगी को किस चीज़ से मुक्ति दिलाता है?
 * (अ) कर्मों के बंधन और पुनर्जन्म से (Freedom from the cycle of birth and death)।
 * (ब) भोजन से।
 * (स) परिवार से।
 * (द) केवल शत्रुओं से।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: जब कर्म बिना स्वार्थ के होता है, तो उसका कोई 'संस्कार' नहीं बनता और मनुष्य मुक्त हो जाता है।

प्रश्न 80: 'द राजस्थान एस्पिरेंट' के अभ्यर्थियों के लिए अंतिम प्रश्न: भारतीय दर्शन का मुख्य लक्ष्य क्या है?
 * (अ) केवल तर्क करना।
 * (ब) दुःखों की आत्यंतिक निवृत्ति और मोक्ष (Cessation of suffering and Liberation)।
 * (स) अमीर बनना।
 * (द) युद्ध जीतना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: पाश्चात्य दर्शन जहाँ जिज्ञासा से शुरू होता है, वहीं भारतीय दर्शन दुःखों के अंत (मोक्ष) की खोज से शुरू होता है।

RPSC 2nd Grade GK: दर्शनशास्त्र (Philosophy)
Master Strike Set-2: पाश्चात्य एवं भारतीय नीतिशास्त्र (1 to 80)
प्रश्न 1: सुकरात (Socrates) के अनुसार 'सद्गुण' (Virtue) क्या है?
 * (अ) केवल धन कमाना।
 * (ब) सद्गुण ही ज्ञान है (Virtue is Knowledge)।
 * (स) डर कर रहना।
 * (द) केवल परंपराओं को मानना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सुकरात का प्रसिद्ध सूत्र है—"ज्ञान ही सद्गुण है।" उनके अनुसार यदि किसी व्यक्ति को वास्तव में सही और गलत का ज्ञान हो जाए, तो वह कभी गलत नहीं कर सकता। बुराई अज्ञानता का परिणाम है।

प्रश्न 2: सुकरात की 'धात्री पद्धति' (Midwifery Method) का क्या अर्थ है?
 * (अ) बच्चों की देखभाल।
 * (ब) प्रश्न-उत्तर के माध्यम से आत्मा में छिपे सत्य को बाहर निकालना। (Extracting truth via dialogue)
 * (स) दवाइयाँ देना।
 * (द) केवल व्याख्यान देना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: जैसे एक दाई (धात्री) बच्चे के जन्म में सहायता करती है, वैसे ही सुकरात तर्क-वितर्क और प्रश्न पूछकर व्यक्ति के भीतर पहले से मौजूद ज्ञान को बाहर निकालते थे।

प्रश्न 3: प्लेटो (Plato) ने 'मुख्य सद्गुणों' (Cardinal Virtues) की संख्या कितनी बताई है?
 * (अ) 3
 * (ब) 4 (Wisdom, Courage, Temperance, Justice)
 * (स) 5
 * (द) 10
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: प्लेटो ने चार मुख्य सद्गुण बताए: 1. विवेक (Wisdom), 2. साहस (Courage), 3. संयम (Temperance), और 4. न्याय (Justice)।

प्रश्न 4: प्लेटो के अनुसार 'न्याय' (Justice) का क्या अर्थ है?
 * (अ) अदालत में केस जीतना।
 * (ब) समाज के तीनों वर्गों का अपना-अपना निर्धारित कार्य करना और दूसरे में हस्तक्षेप न करना। (Functional Specialization)
 * (स) केवल अपराधी को सजा देना।
 * (द) समान संपत्ति का बँटवारा।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: प्लेटो मानते थे कि जब दार्शनिक वर्ग विवेक से शासन करे, सैनिक वर्ग साहस से रक्षा करे और उत्पादक वर्ग संयम से काम करे, तभी राज्य में 'न्याय' की स्थापना होती है।

प्रश्न 5: 'इमैनुएल कांट' (Immanuel Kant) का नीतिशास्त्र किस पर आधारित है?
 * (अ) सुख पर।
 * (ब) कर्तव्य के लिए कर्तव्य (Duty for Duty's sake)।
 * (स) केवल परिणाम पर।
 * (द) डर पर।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: कांट का मानना था कि कर्म का मूल्य उसके परिणाम (सुख) से नहीं, बल्कि कर्म करने की भावना (शुद्ध संकल्प) से तय होता है। हमें कर्म इसलिए करना चाहिए क्योंकि वह हमारा कर्तव्य है।

प्रश्न 6: कांट का 'निरपेक्ष आदेश' (Categorical Imperative) क्या है?
 * (अ) "यदि तुम सफल होना चाहते हो, तो सच बोलो।"
 * (ब) "सच बोलो, चाहे परिणाम कुछ भी हो।" (Unconditional command)
 * (स) केवल दोस्तों की मदद करो।
 * (द) इनमें से कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: निरपेक्ष आदेश वह है जो बिना किसी 'यदि' या 'लेकिन' के लागू होता है। यह एक सार्वभौमिक नियम है जो हर परिस्थिति में पालनीय है।

प्रश्न 7: 'उपयोगितावाद' (Utilitarianism) का मुख्य मंत्र क्या है?
 * (अ) "स्वयं का सुख ही सर्वोपरि है।"
 * (ब) "अधिकतम व्यक्तियों का अधिकतम सुख" (Greatest happiness of the greatest number)।
 * (स) केवल कष्ट सहना।
 * (द) केवल ईश्वर की पूजा।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बेंथम और मिल इस सिद्धांत के जनक हैं। इनके अनुसार वही कार्य नैतिक है जो समाज में सबसे अधिक लोगों को सबसे अधिक सुख पहुँचा सके।

प्रश्न 8: बेंथम (Bentham) ने सुखों के मापन के लिए कौन सी पद्धति दी?
 * (अ) सुखवादी कलन (Hedonistic Calculus)।
 * (ब) थर्मामीटर।
 * (स) तराजू।
 * (द) केवल अनुमान।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: जेरेमी बेंथम ने सुख को मापने के लिए 7 मानक बताए (जैसे तीव्रता, अवधि, निश्चितता आदि)। उनके लिए सुख केवल 'मात्रा' (Quantity) में अलग होते हैं, 'गुण' (Quality) में नहीं।

प्रश्न 9: जे.एस. मिल (J.S. Mill) ने उपयोगितावाद में क्या सुधार किया?
 * (अ) सुखों में गुणात्मक भेद (Qualitative difference in pleasures)।
 * (ब) सुख को पूरी तरह नकार दिया।
 * (स) केवल दुख को महत्व दिया।
 * (द) इनमें से कोई नहीं।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: मिल ने कहा— "एक संतुष्ट सूअर होने से बेहतर है एक असंतुष्ट सुकरात होना।" अर्थात् मानसिक सुख, शारीरिक सुख से श्रेष्ठ होते हैं।

प्रश्न 10: 'चार्वाक' (Charvaka) दर्शन के अनुसार जीवन का परम लक्ष्य क्या है?
 * (अ) मोक्ष
 * (ब) काम/सुख (Material Pleasure)।
 * (स) धर्म
 * (द) स्वर्ग
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: चार्वाक एक नास्तिक और जड़वादी दर्शन है। इनका सूत्र है— "यावज्जीवेत् सुखं जीवेत्, ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्" (जब तक जियो सुख से जियो, चाहे उधार लेकर घी पीना पड़े)।

प्रश्न 11: चार्वाक दर्शन किन वेदों को प्रमाण मानता है?
 * (अ) चारों वेदों को।
 * (ब) किसी भी वेद को नहीं (Anti-Vedic)।
 * (स) केवल ऋग्वेद को।
 * (द) केवल यजुर्वेद को।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: चार्वाक वेदों को 'धूर्तों की रचना' मानते हैं। उनके अनुसार प्रत्यक्ष (Perception) ही एकमात्र प्रमाण है, जो दिखाई नहीं देता (जैसे आत्मा, ईश्वर, स्वर्ग) उसका अस्तित्व नहीं है।

प्रश्न 12: 'ऋण' (Rna) की अवधारणा में 'ऋषि ऋण' से मुक्ति कैसे मिलती है?
 * (अ) दान देने से।
 * (ब) वेदों के अध्ययन और ज्ञान के प्रसार से (Swadhyaya and Teaching)।
 * (स) पुत्र रत्न की प्राप्ति से।
 * (द) तीर्थ यात्रा से।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: ऋषियों ने हमें ज्ञान दिया है, इसलिए उनके प्रति आभार व्यक्त करने के लिए स्वाध्याय और उस ज्ञान को आगे बढ़ाना अनिवार्य है।

प्रश्न 13: उपनिषदों के अनुसार 'ब्रह्म' का स्वरूप क्या है?
 * (अ) सगुण और निर्गुण दोनों (Both Immanent and Transcendent)।
 * (ब) केवल एक मूर्ति।
 * (स) केवल एक राजा।
 * (द) ब्रह्म नहीं होता।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: उपनिषदों में ब्रह्म को सर्वव्यापी और इंद्रियों से परे, दोनों रूपों में बताया गया है। "सर्वं खल्विदं ब्रह्म" (यह सब कुछ ब्रह्म ही है)।

प्रश्न 14: अरस्तू (Aristotle) के अनुसार 'स्वर्ण मध्यमान' (Golden Mean) क्या है?
 * (अ) सोने के सिक्के।
 * (ब) दो अतिवादी स्थितियों के बीच का संतुलित मार्ग (Balance between two extremes)।
 * (स) सबसे अमीर होना।
 * (द) केवल तपस्या करना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: जैसे 'साहस' (Courage) एक सद्गुण है, जो 'कायरता' और 'दुस्साहस' के बीच का संतुलन है। इसी संतुलन को अरस्तू ने 'स्वर्ण मध्यमान' कहा।

प्रश्न 15: गांधीजी के 'एकादश व्रत' में 'अस्वाद' का क्या अर्थ है?
 * (अ) भोजन न करना।
 * (ब) स्वाद के लिए नहीं, बल्कि केवल शरीर के पोषण के लिए सादा भोजन करना (Control of palate)।
 * (स) कड़वा भोजन करना।
 * (द) केवल फल खाना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी मानते थे कि जब तक हम अपनी जीभ (स्वाद) पर नियंत्रण नहीं करेंगे, तब तक इंद्रियों और काम-विकारों पर विजय पाना कठिन है।

प्रश्न 16: 'प्रज्ञापराध' (Pragyaparadh) का दार्शनिक अर्थ क्या है?
 * (अ) बुद्धि का सही प्रयोग न कर पाना या विवेक खो देना। (Intellectual error)
 * (ब) कानूनी जुर्म।
 * (स) चोरी करना।
 * (द) झूठ बोलना।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: भारतीय दर्शन में माना गया है कि जब मनुष्य अपनी बुद्धि (प्रज्ञा) का गलत उपयोग करता है, तभी वह अनैतिक कार्यों की ओर प्रवृत्त होता है।

प्रश्न 17: कांट के अनुसार 'शुभ संकल्प' (Good Will) क्या है?
 * (अ) वह जो दुनिया में बिना किसी शर्त के शुभ है (Only thing good without qualification)।
 * (ब) जो दूसरों का भला करे।
 * (स) जो हमें प्रसिद्ध बनाए।
 * (द) इनमें से कोई नहीं।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: कांट कहते हैं कि बुद्धि, साहस या धन—सबका गलत उपयोग हो सकता है, लेकिन 'शुभ संकल्प' (कर्तव्य पालन की इच्छा) अपने आप में शुभ है।

प्रश्न 18: 'अनेकांतवाद' (जैन दर्शन) का आधुनिक लोकतंत्र में क्या महत्व है?
 * (अ) यह केवल धर्म के लिए है।
 * (ब) यह वैचारिक सहिष्णुता और दूसरों के दृष्टिकोण का सम्मान सिखाता है (Pluralism and Tolerance)।
 * (स) यह वोट डालने की प्रक्रिया है।
 * (द) इसका कोई महत्व नहीं है।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: अनेकांतवाद कहता है कि सत्य के कई पहलू हैं। यह लोकतंत्र में 'असहमति' और 'विविधता' को स्वीकार करने का आधार है।

प्रश्न 19: बुद्ध के 'अष्टांगिक मार्ग' में 'सम्यक् आजीव' (Right Livelihood) का अर्थ है:
 * (अ) बहुत अधिक धन कमाना।
 * (ब) ईमानदारी और अहिंसापूर्ण तरीकों से अपनी आजीविका कमाना (Ethical earning)।
 * (स) कोई भी काम करना।
 * (द) केवल भिक्षा माँगना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: वह काम जिससे दूसरों को कष्ट हो (जैसे हथियारों या मांस का व्यापार), उसे बुद्ध ने 'सम्यक् आजीव' के विरुद्ध माना है।

प्रश्न 20: गांधीजी ने 'वर्ण व्यवस्था' का समर्थन किस आधार पर किया था?
 * (अ) ऊँच-नीच के आधार पर।
 * (ब) पैतृक कर्तव्यों और श्रम विभाजन के आधार पर (Division of labor based on ancestry)।
 * (स) केवल ब्राह्मणों को श्रेष्ठ मानने के लिए।
 * (द) अस्पृश्यता को बढ़ावा देने के लिए।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी वर्ण को 'कर्तव्य' मानते थे, 'अधिकार' या 'विशेषाधिकार' नहीं। उन्होंने अस्पृश्यता (Un-touchability) का कड़ा विरोध किया और उसे हिंदू धर्म का कलंक बताया।

प्रश्न 21: 'नीतिशास्त्र' (Ethics) का मुख्य विषय क्या है?
 * (अ) मानव के ऐच्छिक आचरण का मूल्यांकन (Evaluation of voluntary human conduct)।
 * (ब) केवल कानूनी नियमों की व्याख्या।
 * (स) पशुओं का व्यवहार।
 * (द) ग्रहों की चाल।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: नीतिशास्त्र केवल उन कार्यों की चर्चा करता है जो मनुष्य अपनी इच्छा (Voluntary) से करता है। पागल व्यक्ति या पशु के कार्यों पर नीतिशास्त्र लागू नहीं होता।

प्रश्न 22: 'सुखवाद' (Hedonism) के अनुसार मानव जीवन का 'सर्वोच्च शुभ' (Summum Bonum) क्या है?
 * (अ) ज्ञान
 * (ब) सुख (Pleasure)
 * (स) त्याग
 * (द) मोक्ष
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सुखवाद वह विचारधारा है जो मानती है कि जिस कार्य से सुख मिले वह सही है और जिससे दुख मिले वह गलत।

प्रश्न 23: सुकरात के अनुसार 'बुराई' (Evil) का मूल कारण क्या है?
 * (अ) जानबूझकर की गई गलती।
 * (ब) अज्ञानता (Ignorance)।
 * (स) धन की कमी।
 * (द) दुर्भाग्य।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सुकरात कहते थे— "No man errs willingly" (कोई भी व्यक्ति जानबूझकर गलती नहीं करता)। वह उसे उस समय 'सही' समझकर ही करता है, जो उसकी अज्ञानता है।

प्रश्न 24: प्लेटो की पुस्तक का नाम क्या है जिसमें उन्होंने 'न्याय' की चर्चा की?
 * (अ) द रिपब्लिक (The Republic)
 * (ब) एथिक्स
 * (स) पॉलिटिक्स
 * (द) सोशल कॉन्ट्रैक्ट
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: 'The Republic' प्लेटो की महानतम कृति है, जिसमें उन्होंने एक आदर्श राज्य और न्यायपूर्ण समाज की कल्पना की है।

प्रश्न 25: 'मनुष्य को सदैव साध्य मानो, कभी भी साधन नहीं'—यह किसने कहा?
 * (अ) गांधीजी
 * (ब) कांट (Immanuel Kant - Kingdom of Ends)
 * (स) मार्क्स
 * (द) सुकरात
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: कांट का यह 'मानवता का सूत्र' कहता है कि हर इंसान की अपनी गरिमा है। हमें किसी का इस्तेमाल अपने स्वार्थ के लिए 'साधन' (Tool) की तरह नहीं करना चाहिए।

प्रश्न 26: बेंथम के अनुसार 'सुखवादी कलन' (Felicific Calculus) में 'अवधि' (Duration) का अर्थ है:
 * (अ) सुख कितना गहरा है।
 * (ब) सुख कितने समय तक रहता है (How long the pleasure lasts)।
 * (स) सुख कितनी दूर है।
 * (द) सुख कितना शुद्ध है।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बेंथम का मानना था कि जो सुख ज़्यादा समय तक टिके, वह कम समय वाले सुख से बेहतर है।

प्रश्न 27: 'आत्म-प्रत्ययवाद' (Self-Realization/Eudaemonism) किस पर बल देता है?
 * (अ) केवल शारीरिक सुख पर।
 * (ब) व्यक्तित्व के पूर्ण विकास और आत्मा की पूर्णता पर (Perfecting the self)।
 * (स) केवल धन पर।
 * (द) केवल पूजा पर।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: अरस्तू और टी.एच. ग्रीन जैसे विचारक मानते थे कि जीवन का लक्ष्य केवल सुख नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास करना है।

प्रश्न 28: गांधीजी के 'अहिंसा' सिद्धांत में 'सक्रिय प्रेम' का क्या अर्थ है?
 * (अ) केवल किसी को न मारना।
 * (ब) अपने शत्रु के प्रति भी प्रेम और करुणा रखना (Love for the enemy)।
 * (स) केवल अपनों से प्रेम।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी की अहिंसा 'नकारात्मक' (चोट न पहुँचाना) से ज़्यादा 'सकारात्मक' (सबके लिए प्रेम) थी।

प्रश्न 29: 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (बौद्ध दर्शन) में 'तृष्णा' (Desire) के नाश से क्या होता है?
 * (अ) अज्ञान बढ़ता है।
 * (ब) दुःखों का अंत और निर्वाण (End of suffering)।
 * (स) पुनर्जन्म बढ़ता है।
 * (द) क्रोध आता है।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बुद्ध के अनुसार 'तृष्णा' ही दुःखों की जड़ है। जैसे ही तृष्णा खत्म होती है, जन्म-मरण के चक्र से मुक्ति मिल जाती है।

प्रश्न 30: 'ऋत' (Vedic Rta) का उल्लंघन करने पर दंड देने वाले देवता कौन हैं?
 * (अ) अग्नि
 * (ब) वरुण (Varuna - Lord of Order)
 * (स) इंद्र
 * (द) सूर्य
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: वरुण देव को 'ऋतस्य गोपा' कहा जाता है। वे ब्रह्मांड के नैतिक और प्राकृतिक नियमों के संरक्षक हैं।

प्रश्न 31: 'सांख्य दर्शन' (Samkhya Philosophy) के अनुसार 'प्रकृति' और 'पुरुष' क्या हैं?
 * (अ) दोनों जड़ हैं।
 * (ब) प्रकृति जड़ है और पुरुष चेतन है (Prakriti is Matter, Purusha is Consciousness)।
 * (स) दोनों एक ही हैं।
 * (द) दोनों माया हैं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सांख्य एक द्वैतवादी दर्शन है। प्रकृति (Matter) सक्रिय है लेकिन अंधी है, और पुरुष (Soul) चेतन है लेकिन निष्क्रिय है। दोनों के मेल से सृष्टि चलती है।

प्रश्न 32: उपनिषदों में 'पंचकोश' (Five Sheaths) सिद्धांत में सबसे आंतरिक कोश कौन सा है?
 * (अ) अन्नमय कोश
 * (ब) आनंदमय कोश (Anandamaya Kosha - Sheath of Bliss)
 * (स) विज्ञानमय कोश
 * (द) प्राणमय कोश
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: आत्मा के ऊपर पाँच परतें मानी गई हैं। बाहरी परत 'अन्नमय' (शरीर) है और सबसे भीतरी 'आनंदमय' है, जो आत्मा के सबसे करीब है।

प्रश्न 33: 'यथा पिंडे तथा ब्रह्मांडे' का दार्शनिक अर्थ है:
 * (अ) शरीर और ब्रह्मांड अलग हैं।
 * (ब) जो इस पिंड (शरीर) में है, वही ब्रह्मांड में है (Microcosm reflects Macrocosm)।
 * (स) केवल ईश्वर बड़ा है।
 * (द) इनमें से कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: यह भारतीय दर्शन का महान सूत्र है, जो बताता है कि मनुष्य के भीतर भी वही चेतना है जो पूरे ब्रह्मांड में है।

प्रश्न 40: 'अधिकार' (Rights) और 'कर्तव्य' (Duties) के संबंध में नीतिशास्त्र का क्या मानना है?
 * (अ) दोनों का कोई संबंध नहीं है।
 * (ब) अधिकार और कर्तव्य एक ही सिक्के के दो पहलू हैं (Rights and duties are correlative)।
 * (स) केवल अधिकार महत्वपूर्ण हैं।
 * (द) केवल कर्तव्य महत्वपूर्ण हैं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: मेरा अधिकार आपका कर्तव्य है और आपका अधिकार मेरा कर्तव्य। बिना कर्तव्य के अधिकार 'अराजकता' पैदा करते हैं।


प्रश्न 41: 'सद्गुण' (Virtue) को 'अभ्यास' (Habit) किसने माना?
 * (अ) सुकरात
 * (ब) अरस्तू (Aristotle - Virtue is a habit)
 * (स) कांट
 * (द) बेंथम
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सुकरात इसे 'ज्ञान' मानते थे, लेकिन अरस्तू ने कहा कि केवल ज्ञान काफी नहीं है, सद्गुण बार-बार अभ्यास करने से चरित्र का हिस्सा बनते हैं।

प्रश्न 42: प्लेटो के अनुसार 'विवेक' (Wisdom) किस वर्ग का मुख्य सद्गुण है?
 * (अ) सैनिक वर्ग
 * (ब) शासक/दार्शनिक वर्ग (Rulers/Philosopher Kings)
 * (स) कृषक वर्ग
 * (द) दास वर्ग
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: राज्य का नेतृत्व वही कर सकता है जिसके पास सत्य को जानने की बुद्धि (विवेक) हो।

प्रश्न 43: 'ड्यूटी फॉर ड्यूटी सेक' (Duty for Duty's Sake) का मतलब है:
 * (अ) सजा के डर से काम करना।
 * (ब) कर्म करना क्योंकि वह 'सही' है, न कि किसी लाभ के लिए (Action for its own sake)।
 * (स) केवल वेतन के लिए काम करना।
 * (द) इनमें से कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: यह कांट का सबसे प्रसिद्ध विचार है, जो कर्म की शुद्धता पर जोर देता है।

प्रश्न 44: 'नैतिक निर्णय' (Moral Judgment) का विषय क्या होता है?
 * (अ) मनुष्य की अनैच्छिक क्रियाएं (छींकना, पलक झपकना)।
 * (ब) मनुष्य की ऐच्छिक क्रियाएं और उनके उद्देश्य (Voluntary actions and motives)।
 * (स) कुदरती आपदाएं।
 * (द) मशीनों का काम।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: नीतिशास्त्र केवल उन कामों को जज करता है जिन्हें हमने सोच-समझकर चुना है।

प्रश्न 45: 'अपरिग्रह' (जैन दर्शन) का अर्थ है:
 * (अ) झूठ न बोलना।
 * (ब) वस्तुओं का अनावश्यक संचय न करना (Non-attachment/Non-possession)।
 * (स) चोरी करना।
 * (द) शादी न करना।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: यह लालच को कम करने का व्रत है, जो आज के उपभोक्तावादी युग में बहुत प्रासंगिक है।

प्रश्न 46: गांधीजी के 'सप्त सामाजिक पाप' में 'सिद्धांत बिना राजनीति' का क्या अर्थ है?
 * (अ) राजनीति में केवल जीतना जरूरी है।
 * (ब) राजनीति मूल्यों और सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए (Politics with principles)।
 * (स) राजनीति नहीं करनी चाहिए।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी मानते थे कि धर्म (नीति) और राजनीति अलग-अलग नहीं हो सकते। बिना नीति की राजनीति विनाशकारी है।

प्रश्न 47: 'निर्वाण' (बौद्ध धर्म) प्राप्त व्यक्ति को क्या कहा जाता है?
 * (अ) अर्हत (Arhat)
 * (ब) कैवलिन
 * (स) मुनि
 * (द) देवता
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: थेरवाद बौद्ध धर्म में जिसने अपनी इच्छाओं को जीत लिया है और निर्वाण पा लिया है, उसे 'अर्हत' कहते हैं।

प्रश्न 48: 'उपयोगितावाद' को 'सूअर का दर्शन' (Pig Philosophy) कहकर किसने आलोचना की थी?
 * (अ) जे.एस. मिल
 * (ब) थॉमस कार्लाईल (Thomas Carlyle)
 * (स) कांट
 * (द) अरस्तू
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: कार्लाईल ने बेंथम की आलोचना की थी क्योंकि बेंथम केवल शारीरिक सुखों को महत्व देते थे, जो पशुओं के समान है। बाद में मिल ने इसमें सुधार किया।

प्रश्न 49: 'वैयक्तिक धर्म' और 'सामाजिक धर्म' का समन्वय भारतीय दर्शन में क्या कहलाता है?
 * (अ) वर्णाश्रम धर्म (Varnashrama Dharma)
 * (ब) सन्यास
 * (स) यज्ञ
 * (द) कोई नहीं
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: वर्ण (समाज के प्रति कर्तव्य) और आश्रम (स्वयं के विकास के चरण) का मेल ही संतुलित जीवन है।

प्रश्न 50: 'परोपकाराय पुण्याय पापाय परपीडनम्' का अर्थ है:
 * (अ) दूसरों का भला करना पुण्य है और दूसरों को दुख देना पाप (Altruism is virtue, hurting others is sin)।
 * (ब) केवल अपने बारे में सोचो।
 * (स) पूजा करना पुण्य है।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: यह महर्षि व्यास का सूत्र है जो भारतीय नैतिकता का सरलतम निचोड़ है।

प्रश्न 51: सुकरात को मृत्युदंड क्यों दिया गया था?
 * (अ) चोरी के लिए।
 * (ब) युवाओं को गुमराह करने और राज्य के देवताओं को न मानने के आरोप में (Corrupting the youth and impiety)।
 * (स) युद्ध में भाग न लेने के लिए।
 * (द) राजा का अपमान करने के लिए।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सुकरात लोगों को स्वतंत्र रूप से सोचने और सवाल पूछने के लिए प्रेरित करते थे, जिससे तत्कालीन शासक डर गए थे।

प्रश्न 52: प्लेटो के अनुसार 'संयम' (Temperance) किसका सद्गुण है?
 * (अ) केवल शासकों का।
 * (ब) उत्पादक वर्ग और संपूर्ण समाज का (The whole community/Appetitive part)।
 * (स) केवल सैनिकों का।
 * (द) किसी का नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: संयम का अर्थ है अपनी इच्छाओं को बुद्धि के नियंत्रण में रखना।

प्रश्न 53: कांट के अनुसार 'नैतिक नियम' का स्रोत क्या है?
 * (अ) ईश्वर
 * (ब) अंतरात्मा या व्यावहारिक बुद्धि (Practical Reason/Autonomous Will)।
 * (स) समाज के नियम।
 * (द) जेल का डर।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: कांट मानते थे कि मनुष्य की अपनी बुद्धि ही उसे बताती है कि क्या सही है, इसे 'स्वायत्त नैतिकता' (Autonomy of Will) कहते हैं।

प्रश्न 54: बेंथम के अनुसार 'सुख' और 'दुख' मानव के क्या हैं?
 * (अ) केवल भावनाएं।
 * (ब) दो संप्रभु स्वामी (Two sovereign masters)।
 * (स) बीमारी।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बेंथम ने कहा कि "प्रकृति ने मनुष्य को सुख और दुख नामक दो स्वामियों के अधीन रखा है। हम क्या करेंगे और हमें क्या करना चाहिए, यही दोनों तय करते हैं।"
प्रश्न 55: 'सर्वोदय' (Sarvodaya) का शाब्दिक अर्थ है:
 * (अ) केवल गरीबों का उदय।
 * (ब) सबका उदय या सबका कल्याण (Welfare of All)।
 * (स) केवल हिंदुओं का उदय।
 * (द) सुबह का सूरज।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी का सर्वोदय 'अधिकतम व्यक्तियों का अधिकतम सुख' (उपयोगितावाद) से भी ऊँचा है, क्योंकि यह 'सबके' सुख की बात करता है।

प्रश्न 56: 'प्रज्ञा' (बौद्ध दर्शन) का क्या अर्थ है?
 * (अ) केवल पढ़ना।
 * (ब) यथार्थ ज्ञान या विवेक (Insight/Wisdom)।
 * (स) दान देना।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बौद्ध धर्म में अविद्या (अज्ञान) को मिटाने के लिए प्रज्ञा (शुद्ध ज्ञान) अनिवार्य है।

प्रश्न 57: 'सयंतो' (Syamato) शब्द का संबंध किस दर्शन से है?
 * (अ) बौद्ध
 * (ब) जैन (Syadvada context)
 * (स) सांख्य
 * (द) योग
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: यह स्याद्वाद की प्रक्रिया का हिस्सा है जो 'शायद' या 'सापेक्षता' को दर्शाता है।

प्रश्न 58: 'निष्काम कर्म' योगी समाज में कैसे रहता है?
 * (अ) कमल के पत्ते के समान (Like a lotus leaf in water)।
 * (ब) सबसे अलग होकर।
 * (स) सबको डराकर।
 * (द) केवल सोकर।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: जैसे कमल कीचड़ में रहकर भी उससे लिप्त नहीं होता, वैसे ही योगी संसार के कर्म करते हुए भी उनके फल से लिप्त नहीं होता।

प्रश्न 59: गांधीजी के अनुसार 'सत्याग्रही' को कैसा होना चाहिए?
 * (अ) शारीरिक रूप से बहुत बलवान।
 * (ब) निर्भय और आत्म-अनुशासित (Fearless and self-disciplined)।
 * (स) चालाक और स्वार्थी।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सत्याग्रह कायरों का नहीं, वीरों का आभूषण है। इसके लिए अपार आंतरिक शक्ति चाहिए।

प्रश्न 60: 'उपनिषद' किस भाषा में लिखे गए हैं?
 * (अ) पाली
 * (ब) संस्कृत (Sanskrit)
 * (स) प्राकृत
 * (द) अपभ्रंश
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: उपनिषद प्राचीन संस्कृत (वैदिक संस्कृत) की सर्वोत्कृष्ट रचनाएं हैं।

प्रश्न 61: 'व्यवसाय की नैतिकता' (Business Ethics) में क्या शामिल है?
 * (अ) केवल मुनाफा कमाना।
 * (ब) ईमानदारी, पारदर्शिता और सामाजिक जिम्मेदारी (Integrity and Social responsibility)।
 * (स) मिलावट करना।
 * (द) कर्मचारियों का शोषण।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: आधुनिक समय में नीतिशास्त्र केवल किताबों तक सीमित नहीं है, यह व्यापार और प्रशासन में भी अनिवार्य है।

प्रश्न 62: कांट के अनुसार 'कल्पित आदेश' (Hypothetical Imperative) क्या है?
 * (अ) जो किसी शर्त पर आधारित हो (Conditional command)।
 * (ब) जो कभी न बदले।
 * (स) जो ईश्वर दे।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: जैसे— "यदि तुम्हें स्वस्थ रहना है, तो व्यायाम करो।" यहाँ व्यायाम करना 'शर्त' पर निर्भर है।

प्रश्न 63: 'अहिंसा' (Non-violence) का उच्चतम स्तर क्या है?
 * (अ) केवल शारीरिक चोट न पहुँचाना।
 * (ब) मन में भी किसी के प्रति बैर न रखना (Non-violence in thought)।
 * (स) शत्रु को मार देना।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: भारतीय दर्शन के अनुसार 'मानसिक हिंसा' सबसे खतरनाक है, इसलिए उसे रोकना ही असली अहिंसा है।

प्रश्न 64: 'बुद्ध' का अर्थ क्या है?
 * (अ) एक राजा।
 * (ब) जागृत या प्रबुद्ध (The Awakened One)।
 * (स) एक सन्यासी।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: सिद्धार्थ गौतम को जब ज्ञान प्राप्त हुआ और उनका अज्ञान (अंधेरा) मिट गया, तब वे 'बुद्ध' कहलाए।

प्रश्न 65: गांधीजी के 'अस्तेय' व्रत का अर्थ है:
 * (अ) केवल दूसरे का धन न चुराना।
 * (ब) अपनी जरूरत से ज़्यादा लेना भी चोरी है (Not taking what is not yours)।
 * (स) झूठ बोलना।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी मानते थे कि यदि हम किसी गरीब की हक की वस्तु का उपयोग करते हैं, तो वह भी एक तरह की चोरी है।

प्रश्न 66: 'सद्गुण ही सुख है'—यह किसका विचार है?
 * (अ) सुकरात और स्टोइक्स (Socrates and Stoics)
 * (ब) चार्वाक
 * (स) मार्क्स
 * (द) मैकियावेली
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: सुकरात का मानना था कि एक सद्गुणी व्यक्ति कभी दुखी नहीं हो सकता क्योंकि उसकी आत्मा शांत होती है।

प्रश्न 70: 'रायसीना डायलॉग' (Raisina Dialogue) की तर्ज पर 'नीतिशास्त्रीय संवाद' क्या सिखाता है?
 * (अ) केवल बहस करना।
 * (ब) वैश्विक शांति और नैतिक मूल्यों पर आधारित कूटनीति (Ethics in Diplomacy)।
 * (स) युद्ध की योजना।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: आधुनिक दुनिया में कूटनीति (Foreign Policy) भी नैतिकता से अछूती नहीं रह सकती।

प्रश्न 71: 'ब्रह्मचर्य' (जैन धर्म) को पाँचवें महाव्रत के रूप में किसने जोड़ा?
 * (अ) पार्श्वनाथ
 * (ब) महावीर स्वामी (Lord Mahavira)
 * (स) ऋषभदेव
 * (द) नेमिनाथ
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ ने चार व्रत दिए थे, महावीर स्वामी ने पाँचवें के रूप में 'ब्रह्मचर्य' जोड़ा।

प्रश्न 72: 'शून्यप्रवाह' या 'शून्यता' का सिद्धांत किस बौद्ध दार्शनिक ने दिया?
 * (अ) नागार्जुन (Nagarjuna)
 * (ब) असंग
 * (स) वसुबंधु
 * (द) धर्मकीर्ति
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: नागार्जुन को 'भारत का आइंस्टीन' भी कहा जाता है। उन्होंने शून्यवाद (Madhyamaka) के जरिए बताया कि सब कुछ सापेक्ष है।

प्रश्न 73: गांधीजी की पुस्तक 'हिंद स्वराज' किस वर्ष लिखी गई थी?
 * (अ) 1915
 * (ब) 1909 (Hind Swaraj - Written on a ship)
 * (स) 1930
 * (द) 1942
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: इसमें गांधीजी ने आधुनिक सभ्यता की आलोचना की और 'स्वराज' की अपनी अवधारणा पेश की।

प्रश्न 74: 'निष्काम कर्म' का पालन करने वाला व्यक्ति क्या कहलाता है?
 * (अ) भोगी
 * (ब) योगी (Karmayogi)
 * (स) स्वार्थी
 * (द) कोई नहीं
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: कर्मयोगी वह है जो फल की चिंता किए बिना समाज के प्रति अपने कर्तव्यों को 'ईश्वर' को समर्पित करके करता है।

प्रश्न 75: 'सर्वं दुःखं' (सब दुःख है)—यह विचार निराशावादी है या यथार्थवादी?
 * (अ) केवल निराशावादी।
 * (ब) यथार्थवादी, क्योंकि यह दुःख का समाधान भी बताता है (Optimistic Realism)।
 * (स) गलत विचार।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: बुद्ध केवल दुःख की बात नहीं करते, वे उसे दूर करने का 'मार्ग' भी बताते हैं, इसलिए यह एक आशावादी दर्शन है।

प्रश्न 76: कांट के अनुसार 'इच्छा' (Desire) और 'कर्तव्य' (Duty) में संघर्ष होने पर क्या करना चाहिए?
 * (अ) इच्छा पूरी करनी चाहिए।
 * (ब) इच्छा का दमन करके केवल कर्तव्य का पालन करना चाहिए (Duty over Inclination)।
 * (स) दोनों को छोड़ देना चाहिए।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: कांट के अनुसार नैतिकता वहीं शुरू होती है जहाँ हम अपने व्यक्तिगत झुकाव (Inclination) को छोड़कर कर्तव्य चुनते हैं।

प्रश्न 77: 'उपयोगितावाद' के विरुद्ध सबसे बड़ा तर्क क्या है?
 * (अ) यह अल्पसंख्यकों के अधिकारों की उपेक्षा कर सकता है (Tyranny of the majority)।
 * (ब) यह बहुत कठिन है।
 * (स) यह भगवान को नहीं मानता।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (अ)
   व्याख्या: यदि 90% लोगों के सुख के लिए 10% को कष्ट दिया जाए, तो उपयोगितावाद उसे सही मानेगा, जो नैतिक रूप से गलत हो सकता है।

प्रश्न 78: 'उपनिषद' का मुख्य जोर किस पर है?
 * (अ) क्रियाकांड
 * (ब) ज्ञान (Knowledge/Jnanakanda)
 * (स) पशु बलि
 * (द) मूर्ति पूजा
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: वेदों का कर्मकांड वाला हिस्सा 'ब्राह्मण' ग्रंथों में है, जबकि ज्ञान और रहस्य वाला हिस्सा 'उपनिषदों' में है।

प्रश्न 79: 'सत्य' (Truth) और 'अहिंसा' (Non-violence) में क्या संबंध है?
 * (अ) कोई संबंध नहीं है।
 * (ब) अहिंसा साधन है और सत्य साध्य (Non-violence is the means, Truth is the end)।
 * (स) दोनों एक ही हैं।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: गांधीजी कहते थे कि सत्य रूपी भगवान को पाने का एकमात्र रास्ता अहिंसा है।

प्रश्न 80: 'द राजस्थान एस्पिरेंट' के लिए अंतिम प्रश्न: दर्शनशास्त्र पढ़ने का सबसे बड़ा व्यावहारिक लाभ क्या है?
 * (अ) केवल परीक्षा पास करना।
 * (ब) जीवन के प्रति एक तार्किक, नैतिक और संतुलित दृष्टिकोण विकसित करना (Critical and ethical thinking)।
 * (स) लोगों से बहस जीतना।
 * (द) कोई नहीं।
   उत्तर: (ब)
   व्याख्या: दर्शनशास्त्र हमें 'क्यों' और 'कैसे' सोचना सिखाता है, जो एक प्रशासनिक अधिकारी (2nd Grade Teacher) के लिए बहुत जरूरी है।